Wednesday, July 10, 2013

प्यारे दोस्तो!
आप सभी लोगों को रमज़ान की बहुत बहुत मुबारकबाद! जैसा कि आप सब जानते हैं कि इसी रमज़ान के महीने में पहली बार क़ुरआन की आयतें मुहम्मद (सल.) पर उतरनी शुरू हुईं और यही वजह है कि इस महीने में इस किताब को पढ्ने की ख़ास फज़ीलत है. आप सब भी उम्मीद है कि इस महीने में इस किताब को ज़रूर पढेंगे इंशाअल्लाह ! और ज़ाहिर है कि किताब को पढ्ने का मतलब है कि उसको अच्छी तरह समझ बूझ कर पढ्ना!
क़ुरआन का अर्थ और मतलब समझने के लिये उर्दू में काफी किताबें मौजूद हैं पर अफसोस  की बात यह है कि आज की युवा पीढी उर्दू कम ही जानती है. और जो उर्दू जानते भी हैं उनके लिये भी उन किताबों को पढ कर समझना आसान नहीं है क्योंकि उन किताबों की भाषा और शैली काफी पुरानी है और उनमें इस्तेमाल किये गये बहुत से शब्द इस ज़माने में उतने प्रचलित नहीं हैं.
आज के नौजवान ज़्यादातर अंग्रेज़ी में ही पढ लिख रहे हैं और यह अच्छी बात है कि क़ुरआन के ऊपर अंग्रेज़ी में बहुत काम हो रहा है और नए नए अंदाज़ में बहुत किताबें लिखी जा रही हैं. आज आसान ज़बान में भी अंग्रेज़ी के कई अनुवाद आ चुके हैं, पर इसके बावजूद ऐसे लोगों की संख्या कहीं ज़्यादा  है जो क़ुरआन को उर्दू या हिंदी में ज़्यादा बेहतर तरीक़े से समझ सकते हैं शर्त यह है कि उन्हें आसान ज़बान में बातें बतायी जाएं.
      हिंदी भाषा में भी  क़ुरआन के कई अनुवाद मिल जाते हैं मगर उनमें दो क़िस्म के अनुवाद हैं, एक तो ऐसा  अनुवाद है जो शुद्ध हिंदी में किया गया है जिसे समझने में दिक़्क़त होती है और दूसरी क़िस्म है ऐसे अनुवादों की  है जो लिखा तो होता है देवनागरी लिपी यानि हिंदी में मगर वह होता है अस्ल में खांटी उर्दू में जिसे भी समझना मुश्किल है.
      इन्हीं परेशानियों को देखते हुए मेरी यह इच्छा हुई है कि क़ुरआन पाक का एक आसान हिंदी अनुवाद करना चाहिए जो आजकल की शैली में हो और जिसे पढ् कर बातें समझी जा सकें. यह ख़ासकर आज की युवा पीढी को ध्यान में रख कर लिखी जाए जिसमें भाषा का कोई उलझाव न हो. मगर यह काम मेरे जैसे कम पढे लिखे आदमी के लिए आसान नहीं है. फिर भी मैंने अल्लाह का नाम लेकर इस काम को शुरू कर  दिया है मगर वक़्त की कमी और दूसरी व्यस्तता के कारण काम बहुत धीमा चल रहा है.
     मैंने अनुवाद का काम पीछे यानि 30वें पारे से शुरू किया है. अभी यह सिर्फ अनुवाद ही है और मैंने उसमें कोई  explanatory notes नहीं लिखा है जिससे समझने में आसानी हो सके. आगे इंशाअल्लाह मैं थोड़ा थोड़ा करके आयतों का अनुवाद इस ब्लाग के ज़रिए  post  करूंगा. चूँकि यह एक trial  मात्र है इसलिए मुझे आप सब की प्रतिक्रिया औरसुझाव चाहिए ताकि इसे और बेहतर और फायदामंद बनाया जा सके. मेरा अनुरोध है कि आप इसे पढें और दूसरी किताबों से मिला कर भी देखें और अपने दोस्तों को बताएं ताकि मुझे ज़्यादा से ज़्यादा सुझाव मिल सके. शुक्रिया!  मेरे अगले ब्लाग का इंतेज़ार करें.......

No comments:

Post a Comment

Surah/सूरह 1: Al-Fatiha/अल-फ़ातिहा [(किताब की) शुरुआत/ The Opening]

       सूरह 1: अल-फ़ातिहा    [(किताब की) शुरुआत/ The Opening] यह एक मक्की सूरह है। पूरे क़ुरआन में अल्लाह का जो संदेश आया है , उसका इस सूरह मे...