Thursday, June 25, 2015

सूरह 92 : अल-लैल [रात, The Night]

 सूरह 92: अल-लैल [रात/The Night]


01-13: अच्छाई और बुराई का रास्ता 

14-21: चेतावनी और वादा 

 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है

रात की क़सम जब वह छा जाए (और हर चीज़ को अपने अंधेरे में छुपा ले), (1)

दिन की क़सम जब उसका उजाला फैल जाए,  (2)

और उस हस्ती (की) क़सम जिसने (हर चीज में) नर और मादे को पैदा किया!  (3)

(अपने मक़सद को पाने के लिए) तुम्हारे रास्ते [कर्म व प्रयास] काफ़ी अलग अलग तरह के हैं।  (4)

अब जिस किसी ने (अल्लाह की राह में) अपना माल दिया, जो अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचता रहा,  (5)

जिसने अच्छाई की बात को दिल से माना —  (6)

तो हम उसे आराम की मंज़िल [जन्नत] तक पहँचने के लिए  रास्ता आसान कर देंगे।  (7)

और जिस किसी ने (अपने माल को अल्लाह की राह में ख़र्च करने में) कंजूसी  की, और (अल्लाह से) अलग  होकर अपने आप में मगन रहा, (8)

जिसने अच्छाई की बात को मानने से इंकार किया—-  (9)

तो हम उसे तकलीफ़ की मंज़िल [जहन्नम] तक पहुँचने के लिए रास्ता आसान  कर देंगे, (10)

और जब वह तबाही (के गड्ढे) में गिरेगा तो उसका माल उसके किसी काम नहीं  आएगा। (11)

 

यह सच है कि (सच्ची और सही) राह दिखाना हमारे ज़िम्मे है—- (12)

(याद रहे!), कि हम इस दुनिया और आनेवाली दुनिया, दोनों के ही मालिक हैं——-  (13)

अत: मैं तुम्हें (जहन्नम की) भड़कती हुई आग से सावधान करता हूँ,  (14)

जिसमें कोई और नहीं, वही अत्यंत दुष्ट व अभागा जलेगा,  (15)

जिसने (सच्चाई) को मानने से इंकार किया और (रसूल की बातों से) मुँह फेर लिया।  (16)

उस (आग) से ऐसे बेहद परहेज़गार [Pious] आदमी को दूर रखा जाएगा—— (17) 

जो अपने मन के मैल को दूर करने के लिए अपना माल (अल्लाह की राह में) देता है, (18)

हालाँकि किसी का उस पर कोई उपकार नहीं था जिसका वह  बदला चुकाता है,  (19)

बल्कि (वह) तो केवल अपने महान रब की खुशी के लिए (माल खर्च करता है)  —– (20)

और वह (अल्लाह के इनाम से) बहुत ख़ुश हो जाएगा। (21) 

 


नोट:

4: इंसानों के कर्म अलग-अलग तरह के होते हैं, अच्छे भी और बुरे भी, और उनके कर्मों के नतीजे भी उसी हिसाब से अलग-अलग होते हैं, जैसाकि आगे बताया गया है। यह बात कहने के लिए रात और दिन की क़सम खाने का शायद मक़सद यह है कि जिस तरह रात और दिन के नतीजे अलग-अलग होते हैं,  उसी तरह नेकी और बुराई के नतीजे भी भिन्न-भिन्न होते हैं। और जिस तरह अल्लाह ने नर और मादे की विशेषताएं अलग-अलग रखी हैं, उसी तरह कर्मों की विशेषताएं भी अलग-अलग हैं।

6: अच्छाई की बात का मतलब अल्लाह के संदेशों की सच्चाई पर विश्वास कर लेना।

7: सचमुच जन्नत ही असल आराम की जगह है, और वहाँ पहुँचने का रास्ता आसान करने का मतलब यह है कि अल्लाह ऐसे आदमियों को भलाई के काम करने की तौफ़ीक़ दे देगा।

10: असल तकलीफ़ की जगह जहन्नम" है। अल्लाह कहता है़ कि जो गुनाहों में लगा रहना चाहता है, उसे भी गुनाह करने के लिए छूट दी जाएगी।

13: अत: यह हक़ अल्लाह ही को हासिल है कि वह इंसान को दुनिया में रहने के लिए मार्गदर्शन और आदेश दे और फिर अंत में इंसानों के कर्मों के अनुसार इनाम या दंड दे।

21: ऐसा आदमी जन्नत में अपने कर्मों के चलते अल्लाह द्वारा मिलने वाले इनाम से बहुत ख़ुश हो जाएगा। 

          

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