सूरह 95 :
अत तीन
[अंजीर, The Fig]
अल्लाह
के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
अंजीर [Fig]
की क़सम और ज़ैतून [Olive]
की क़सम, (1)
और सीना के (पहाड़, Mount Sinai) तूर की क़सम, (2)
और इस अमन-शांतिवाले शहर [मक्का] की क़सम,
(3)
बेशक हम इंसान को बेहतरीन (अनुपात और संतुलित)
साँचे में ढालकर पैदा करते हैं (4)
फिर हम उसे नीचे वालों में सबसे गिरी हुई हालत [बुढ़ापे] में पहुँचा देते हैं, (5)
सिवाय उन लोगों के जो ईमान
लाए, और अच्छे कर्म करते रहे ---- तो उनके लिए कभी समाप्त न होने वाला इनाम है। (6)
फिर
उसके बाद, [ऐ इंसान!], किस
चीज़ ने तुम्हें अंतिम फ़ैसले [इनाम और सज़ा] को मानने से इंकार करने पर मजबूर कर दिया?
(7)
क्या अल्लाह (जिसने सबको पैदा किया) सब हाकिमों से सबसे ज़बरदस्त (फ़ैसला करने वाला) हाकिम नहीं है? (8)
नोट :
1: अंजीर और ज़ैतून के पेड़ ज़्यादातर फिलिस्तीन और सीरिया में पाए
जाते हैं, जिनका
संबंध ईसा अलै. से है, जहाँ वह नबी बनाए गये थे और उन्हेंं इंजील दी गयी थी।
2: सीना का पहाड़, तूर का संबंध मूसा अलै. से है, जहाँ उनको नबी बनाया गया और उन्हेंं तौरात दी गयी। देखें 52:1
3: अमन वाले शहर यानी "मक्का" (देखें 2:126), जहाँ मुहम्मद (सल्ल.) नबी बनाए गए और उन्हें क़ुरआन दी गयी।
6: यह इनाम उन्हें दूसरी ज़िंदगी में जन्नत के रूप में दिया जाएगा।
7: या कौन कह सकता था कि [ऐ रसूल], आप अंतिम फ़ैसले के बारे में झूठ बोल रहे हैं?
No comments:
Post a Comment