Friday, July 26, 2013

सूरह 71 : नूह [Noah]

सूरह 71: नूह [Noah]



01-20: नूह (अलै) का मिशन और संदेश 

21-28: नूह की क़ौम ने उन्हें ठुकराया और बर्बाद हो गए 



अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है 

हमने नूह [Noah] को उनकी क़ौम के पास भेजा: "आप अपने लोगों को सावधान कर दें, इससे पहले कि उन पर कोई दर्दनाक यातना  [punishment] आ पहुँचे।" (1)

(चुनांचे) उन्होंने कहा, “ए मेरी क़ौम के लोगो! मैं तुम लोगों को साफ़-साफ़ चेतावनी देने आया हूँ।  (2)

तुम अल्लाह की इबादत करो, उसी से डरो और मेरा कहना मानो। (3)

अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक (ज़िंदा) बाक़ी रखेगा --- जब अल्लाह का (निर्धारित) समय आ जाता है, तो वो टाला नहीं जा सकता। काश! तुम (यह बात) समझ पाते!” (4)

(फिर) नूह ने (अल्लाह से) कहा, “ऐ मेरे रब! मैं अपनी क़ौम को रात दिन (सच्चाई की बातों की तरफ़) बुलाता रहा,  (5)

लेकिन मैं जितना ही उनको (सच्चाई की तरफ़) बुलाता हूँ, उतना ही वे और ज़्यादा (सच्चाई से) दूर भागते हैं: (6)

जब (भी) मैं उन्हें (ईमान की तरफ़) बुलाता हूँ, ताकि तू उन्हें माफ़ कर सके, तो वे अपनी अंगुलियाँ कानों में ठूंस लेते हैं और अपने ऊपर अपने कपड़े तान लेते हैं, अपनी (गलत) बातों पर अड़े रहते हैं, और उनका घमंड और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। (7)

मैं उन्हें खुलकर (सच्चाई की तरफ़) बुलाने की कोशिश कर चुका हूँ।   (8)

मैंने उन्हें सब के सामने भी उपदेश देने की कोशिश की है और उन्हें अकेले में भी समझाने की कोशिश की है। (9)

मैंने कहा, "तुम अपने रब से (गुनाहों की) माफ़ी माँगो: वह बड़ा माफ़ करनेवाला है। (10)

वह तुम्हारे लिए आसमान से ख़ूब पानी बरसाएगा;   (11) 

वह तुम्हें धन-दौलत और बेटे देगा; वह तुम्हारे लिए बाग़ उगा देगा और नहरें बहा देगा। (12)

तुम्हें क्या हो गया है? अल्लाह की महिमा से तुम डरते क्यों नहीं,  (13)

जबकि उसने तुम्हें एक-के-बाद-एक कई चरणों [stage by stage] में (से गुज़ार कर) पैदा किया है? (14)

क्या तुमने कभी इस बात पर विचार किया कि किस तरह अल्लाह ने सात (या कई) आसमानों को तल्ले ऊपर पैदा किया,  (15)

उनमें चाँद को रौशनी और सूरज को दीपक [प्रकाश और ताप के स्रोत] के रूप में स्थापित किया, (16)

और किस तरह अल्लाह ने तुम्हें ज़मीन से पौधे की तरह उगाया है* (17)

किस तरह वह तुम्हें उसी (भूमि) में लौटा देगा और फिर तुमको (वहीं से दोबारा) बाहर ला खड़ा करेगा,  (18)

और किस तरह अल्लाह ने तुम्हारे लिए ज़मीन को फर्श की तरह बिछा दिया है, (19)

ताकि तुम उसके खुले हुए रास्तों में चलो फिरो।"  (20)
 

नूह ने कहा, “ऐ मेरे रब! हक़ीक़त यह है कि उन लोगों ने मेरा कहना नहीं माना, और उन (सरदारों) के पीछे चल पड़े जिनके धन-दौलत और संतानों ने उन्हें सिवाय नुक़सान पहुँचाने के और कुछ नहीं दिया;  (21)

और (जनता को गुमराही में रखने के लिए) वे बड़ी-बड़ी चालें चलते रहे, (22)

और (उन लोगों ने अपने आदमियों से) कहा,  "तुमलोग अपने भगवानों [gods] को कभी मत छोड़ना! और “वद्द”, “सुवा”, “यग़ूस”, “यऊक़” और “नस्र” (नाम के देवताओं) को (भी) कभी नहीं छोड़ना!” (23)

उन्होंने बहुत लोगों को गुमराह [पथभ्रष्ट] किया है। सो (ऐ मेरे रब!), तू इन ज़ालिमों के लिए सिवाय बर्बादी के और कुछ न ला।" (24)
 

(अंत में) वे अपने पापों के कारण ही (ज़बरदस्त बाढ़ में) डुबा दिए गए, और (जहन्नम की) आग में डाल दिए गए: अल्लाह के मुक़ाबले में उन्हें कोई मददगार नहीं मिल सका।  (25)

और नूह ने यह भी कहा, “ऐ मेरे रब! (सच्चाई से) इंकार करने वालों में से किसी को भी इस धरती पर ज़िंदा न छोड़ ----- (26)

अगर तूने उन्हें (जीवित) छोड़ा, तो वे तेरे बन्दों को गुमराह करते रहेंगे, और उनसे जो औलाद पैदा होगी, वह केवल पाप करने वाली (और) विश्वास न करने वाली पैदा होगी ---- (27)

“ऐ मेरे रब! मुझे भी माफ़ कर दे और मेरे माँ-बाप को भी, और हर उस आदमी को जो ईमान की हालत में मेरे घर में दाख़िल हुआ। (सभी) ईमान रखने वाले मर्दों और औरतों को भी माफ़ कर दे, मगर ज़ालिमों के लिए बर्बादी के सिवाए कोई और चीज़ न ला।” (28) 
 
 
 
 
नोट: 
 

1: इस सूरह में अल्लाह क़ा संदेश पहुंचाने के लिए हज़रत नूह (अलै.) द्वारा किए गए संघर्षों और आपकी दुआओं का वर्णन है। आपके बारे में अधिक विवरण सूरह यूनुस (10:17) और सुरह हूद (11:36) में मिलता है। 

 

14: यानी इंसान वीर्य [sperm] से लेकर जीता जागता आदमी बनने तक विभिन्न चरणों से गुज़रता है जिनका विवरण सूरह हज (22: 5) और सूरह मोमिनून (23 :14) में भी मिलता है। यह सारे चरण अल्लाह की विशाल क़ुदरत पर गवाही देते हैं। अत: इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि वह मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करने में सक्षम है।

 

17: जिस तरह एक पौधा जमीन मे विभिन्न चरणों से गुज़रते हुए उगता है, उसी तरह अल्लाह ने तुम्हें विभिन्न चरणों से गुज़ार कर इस जमीन में पैदा किया है। और जिस तरह जमीन से उगने वाला पौधा नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाता है और फिर जब अल्लाह चाहता है उस पौधे को दोबारा उसी मिट्टी से उगा देता है, इसी तरह तुम भी मरकर मिट्टी में मिल जाओगे, फिर जब अल्लाह चाहेगा तो तुम्हें दोबारा जिंदा करके जमीन से दोबारा निकाल लेगा।

 

22: यह उन साज़िशों की तरफ इशारा है जो हज़रत नूह (अलै.) के दुश्मन उनके विरुद्ध कर रहे थे।


23: यह सब उन देवी-देवताओं के नाम हैं जिन्हें हज़रत नूह (अलै.) की क़ौम पूजती थी। 

 

27: सूरह हूद (11:36) में आया है कि अल्लाह ने हज़रत नूह (अलै.) को "वही" [Revelation] के द्वारा बता दिया था कि उस समय तक जितने लोग आप पर विश्वास रखते थे, उनके सिवा अब कोई और विश्वास करनेवाला नहीं है।

 

28: ईमान की शर्त इसलिए लगाई कि आपके घर वालों में से आपकी बीवी आखिर तक काफ़िर रही और उसने आप पर विश्वास नहीं किया, जैसाकि सूरह तहरीम (66 :10) में आया है।

 

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