Monday, July 7, 2014

प्यारे दोस्तो,

फिर से आप सबको रमज़ान की मुबारकबाद ! पिछले साल मैंने इसी रमज़ान के पाक महीने में यह ब्लाग  शुरू किया था और आपके सामने क़ुरआन की सूरह 67 से सूरह 78 तक का आसान अनुवाद पेश किया था. मेरा इरादा तो इसे लगातार लिखने का था पर यह हो न सका. मेरी व्यस्तता से कहीं ज़्यादा मेरी सुस्ती और कोताही इसके मुख्य कारण हैं. बहरहाल,  कुल मिलाकर आप सब ने इसे पसंद तो किया पर इस अनुवाद की  कमियों  या त्रूटियों पर कोई कमेंट नहीं किए.  

              इस बार मैं इंशा अल्लाह सूरह 79 से आख़िर तक यानी सूरह 114 तक का अनुवाद आपके सामने रखूंगा. जैसा मैंने पहले भी कहा था कि अभी यह मात्र अनुवाद  ही है और इसमें मैंने कोई व्याख्या नहीं डाली है. कहीं कहीं किसी आयत के एक से अधिक मतलब निकलते हैं,  वैसी जगहों पर जो सब से ज़्यादा मान्य और प्रचलित अर्थ  बताए गए  हैं  मैंने उसी का इस्तेमाल किया है.

शुक्रिया!

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