सूरह 88: अल-ग़ाशियह
[छा जानेवाली घटना / The Overwhelming Event]
01-16: छा जाने वाली (क़यामत) की घटना
17-20: अल्लाह की ताक़त की निशानियाँ
21-26: सावधान कर दें
अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
क्या [ऐ रसूल!] आपको (हर चीज पर) छा जाने वाली घटना [क़यामत] की खबर पहुंची है? (1)
उस दिन कितने ही चेहरे अपमानित और उतरे हुए होंगे, (2)
(सांसारिक फ़ायदे के लिए) मुसीबत झेलते हुए, थकान से चूर! (3)
वे (जहन्नम की) दहकती हुई आग में जा गिरेंगे (4)
और उन्हें खौलते हुए सोते [spring] से (पानी) पिलाया जाएगा, (5)
उनके लिए काँटेदार सूखी ज़हरीली झाड़ियों के अलावा कुछ खाना नहीं होगा (6)
जो न बदन को मोटा [nourish] करेगा और न भूख ही मिटायेगा। (7)
(इसके विपरीत) उस दिन बहुत से चेहरे ऐसे भी होंगे जो ख़ुशी से चमकते और खिले-खिले होंगे, (8)
(दुनिया में अच्छे काम के लिए) अपनी की हुई मेहनत के नतीजे में बहुत खुश होंगे, (9)
आलीशान जन्नत में (ठहरे) होंगे, (10)
जहाँ कोई बेकार और व्यर्थ बात न सुनेंगे, (11)
बहते हुए पानी के सोतों [spring] के बीच, (12)
ऊँचे (बिछे हुए) तख़्त होंगे, (13)
प्याले (सजाकर) सामने रखे हुए होंगे,(14)
और गाओ-तकिये लाइन से लगे होंगे, (15)
और (मुलायम व नफ़ीस [refined]) क़ालीनें बिछी होंगी। (16)
क्या विश्वास न करनेवाले देखते नहीं कि ऊँट किस तरह (अजीब ढाँचे का) पैदा किया गया है? (या क्या ये लोग बारिश से भरे हुए बादलों को नहीं देखते कि वे कैसे तैयार होते हैं), (17)
आसमान को कैसे (ज़बरदस्त विस्तार के साथ) उठाया गया है, (18)
पहाड़ों को कैसे (ज़मीन से उभारकर) खड़ा किया गया है, (19)
पृथ्वी कैसे (गोलाई के बावजूद) बिछाई गई है? (20)
इसलिए (ऐ रसूल!) आप उन्हें चेतावनी दे दें: आपका तो काम ही नसीहत करना है, (21)
आपका काम उन लोगों पर नियंत्रण [control] रखना नहीं है (कि लोगों को ईमान लाने पर मजबूर करें)। (22)
रहे वे लोग जिन्होंने (सच्चाई से) मुँह मोड़ा और विश्वास करने से इंकार किया, (23)
तो अल्लाह उन पर ज़बरदस्त यातना थोप देगा। (24)
हमारे ही पास उन सबको लौटकर आना है, (25)
और फिर (उनके कर्मों का) हिसाब लेने की ज़िम्मेदारी हमारी है। (26)
नोट:
17: अरब के लोग आमतौर से मरुस्थलों में ऊंट पर सफ़र करते थे। ऊँटों की रचना में जो अजीब विशेषताएं होती हैं, वे उनसे परिचित थे। इसके अलावा ऊँटों पर सफ़र करते वक्त उन्हें आसमान, जमीन, और पहाड़ नजर आते थे। अल्लाह कहता है कि यह लोग अगर अपने आसपास की चीजों पर ही विचार कर
लेंं, तो उन्हें पता चल जाए कि जिस हस्ती ने यह आश्चर्यजनक चीज़ें पैदा की हैं, उसे अपनी ख़ुदायी में किसी साझेदार [Partner] की ज़रूरत नहीं है, और अगर वह संसार की सारी चीज़ों को पैदा करने में सक्षम
है,
तो वह इंसानों को मरने के बाद दोबारा जिंदा करने और उनसे उनके कर्मों का हिसाब
लेने में भी पूरी तरह सक्षम है। उसने संसार की रचना बिना किसी
मक़सद के नहीं की है, बल्कि उसका उद्देश्य यही है कि दुनिया में नेक कर्म करने वालों को अच्छे काम का इनाम दिया जाए और बुरे कर्म करने वालों को उनकी बुराई की सज़ा दी जाए।
22: सच्चाई पर विश्वास न करनेवालों की हठधर्मी पर मुहम्मद (सल्ल) को तकलीफ़ होती थी, सो यहाँ आपको
तसल्ली दी गयी है कि आपकी ज़िम्मेदारी केवल लोगों तक अल्लाह का संदेश पहुँचा देना है, उन्हें ज़बरद्स्ती मुसलमान बनाना नहीं है। यहाँ से यह उसूल निकलता है कि जो कोई भी अल्लाह के दीन को लोगों तक पहुँचाना चाहता है, उस पर यह ज़िम्मेदारी नहीं डाली गयी है कि वह
किसी को अपनी बात ज़बरदस्ती मनवा ले।
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