Wednesday, July 23, 2014

सूरह 86 : अत तारिक़ [रात को (नज़र) आनेवाला / The Night-Comer]

सूरह 86: अत-तारिक़ 
[रात को (नज़र) आनेवाला / The Night-Comer]


01-10: हर आदमी को परखा जाएगा

11-14: क़ुरआन का संदेश कोई हँसी-मज़ाक़ की चीज़ नहीं 

15-17: विश्वास न करने वालों को थोड़ी सी ढील दे दें 



अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
आसमान (पर फैले हुए अंतरिक्ष) की क़सम, और रात को (नज़र) आने वाले की क़सम -----  (1)
और आपको क्या मालूम कि रात को (नज़र) आने वाला क्या है?  (2)
चमकता हुआ तारा (जो आसमान के अँधेरे को मिटा देता है) ----  (3)
कि कोई जान ऐसी नहीं जिस पर एक निगरानी करनेवाला [watcher] (नियुक्त) नहीं है।  (4)
इसलिए आदमी को सोच-विचार करना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया था?  (5)
वह ज़ोर से उछलते हुए पानी [शुक्राणु/sperm] से पैदा किया गया है,  (6)
फिर वह (माँ की) पीठ और सीने की हड्डियों के बीच (कोख में) से गुज़रकर बाहर निकलता है:  (7)
(जिस तरह माँ के कोख से निकलता है, उसी तरह क़ब्र से भी ज़िंदा निकलेगा!) बेशक वह [अल्लाह] इसे दोबारा पैदा करने में पूरी तरह समर्थ है।  (8)
जिस दिन (दिलों में) छुपी बातें सामने आ जाएंगी (और उन्हें परखा जाएगा),  (9)
फिर आदमी के पास न (स्वयं) कोई ताक़त होगी, और न कोई (उसको) मदद करने वाला होगा।  (10)
क़सम है आसमान की और उससे बार-बार होने वाली (मौसमी) बारिश की,   (11)
और ज़मीन की क़सम है जो फट जाती है (और उसमें से पौधे निकल आते हैं, उसी तरह क़यामत के दिन, आदमी ज़मीन फाड़कर बाहर निकल आएगा)। (12)
यह सचमुच एक निर्णायक [decisive] फ़रमान है (जो होकर रहेगा);  (13)
यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे (हँसी-मज़ाक़ के तौर पर) हल्के में लिया जाए।  (14)
वे [काफ़िर लोग] अपनी योजना बनाने और चाल चलने में लगे हुए हैं,  (15)
मगर मैं भी अपनी तदबीर [strategy] में लगा हूँ:  (16)
इसलिए [ऐ रसूल], आप विश्वास न करनेवालों को ढील दे दीजिए, उन्हें थोड़ी सी ढील (और) दे दीजिए।   (17)
 
 
 
 
नोट:
 

1: "तारिक़" यानी चमकते हुए तारे की क़सम खाकर कहा गया है कि कोई इंसान ऐसा नहीं है जिसपर कोई निगरानी करने वाला नियुक्त न हो। तारे की क़सम का मक़सद शायद यह मालूम होता है कि जिस प्रकार तारे आसमान पर दुनिया की हर जगह से नज़र आते हैं, और दुनिया की हर चीज़ उनके सामने होती है, उसी तरह अल्लाह ख़ुद भी इंसान के हर काम पर नज़र रखता है और उसके फरिश्ते भी इस काम के लिए नियुक्त हैं।

 

12: यहाँ बारिश और ज़मीन के फट पड़ने की क़सम खाने का मक़सद शायद यह लगता है कि बारिश के पानी से वही ज़मीन फ़ायदा उठाती है जिसमेंं उगने की सलाहियत हो। इसी तरह क़ुरआन से भी वही फ़ायदा उठाता है जिसके दिल में सच्चाई को मान लेने की चाहत हो।

एक नन्हे से पौधे की कोंपल इतनी भारी ज़मीन को फाड़कर जिस तरह बाहर निकल आती है, वह अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वावाकर लेने के लिए काफ़ी होना चाहिए (देखें 80:26).


13: क़ुरआन को "निर्णायक फ़रमान" कहा गया है।


17: देखें 73:11

 


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