Friday, July 18, 2014

सूरह 84 : अल इंशिक़ाक़ [फट पड़ना / Ripped Apart]

सूरह 84: अल-इंशिक़ाक़
[फट पड़ना / Ripped Apart]



01-06: क़यामत का दिन

07-15: कर्मों का हिसाब-किताब 

16-19: आदमी का एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक बढ़ना 

20-25: क़ुरआन को ठुकरा देने वालों को चेतावनी


अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है

जब आसमान फट पड़ेगा,  (1)

अपने रब का आदेश मानते हुए, कि यही करना उस (आसमान) के लिए ज़रूरी होगा,  (2)
  
जब ज़मीन (खींच करके) फैला दी जाएगी, (3)

तो जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक देगी, और ख़ाली हो जाएगी, (4)


अपने रब का आदेश मानते हुए, कि यही करना उस (ज़मीन) के लिए ज़रूरी होगा,  (5)


ऐ इंसान! तू अपने रब तक पहुंचने में (ज़िंदगी भर) भारी मेहनत करता रहा, अंतत: तू उस (रब) से जा मिलेगा: (6)


तो जिस आदमी के कर्मों का लेखा-जोखा उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा, (7)


तो उससे आसान-सा हिसाब लिया जाएगा (8)


और वह अपने घरवालों के पास खुशी-खुशी लौटेगा।  (9)


मगर जिस किसी को उसका लेखा-जोखा उसकी पीठ के पीछे से (बायें हाथ में) दिया जाएगा, (10)


तो वह अपनी बर्बादी को पुकार उठेगा ------ (11)


वह जहन्न्म की भड़कती हुई आग में जलेगा। (12)


वह (दुनिया में) अपने परिवार के साथ हँसी-ख़ुशी रहा करता था। (13)


उसको ऐसा लगता था कि (अल्लाह के सामने) वह कभी लौटकर नहीं जाएगा ---- (14)


सचमुच! (वह ज़रूर लौटेगा!) उसका रब उसको देख रहा था। (15)


मुझे क़सम है सूरज डूबने के समय की लाली की,  (16)


क़सम है रात की, और उन चीजों की जिन्हें वह ढक लेती है, (17)


और क़सम है चाँद की, जब वह (बढ़ते-बढ़ते) पूरा दिखाई देता है, (18)

तुम (जीवन के) एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक [बचपन, जवानी, अधेड़ उम्र, बुढ़ापा] इसी तरह से बढ़ते जाओगे।  (19)


तो वे (सच्चाई पर) विश्वास क्यों नहीं करते? (20)

जब उनके सामने कुरआन पढ़ी जाती है, तो वे (अल्लाह के सामने) सज्दे में क्यों नहीं झुक जाते? (21)


नहीं! बल्कि विश्वास न करनेवाले [काफ़िर] लोग क़ुरआन को ठुकरा देते हैं ---- (22)


अल्लाह बेहतर जानता है जो कुछ इन लोगों ने अपने अंदर छिपा रखा है---- (23)


सो आप उन्हें दर्दनाक यातना की ख़ुशख़बरी सुना दें।  (24)


मगर जो लोग विश्वास रखते हैं, और अच्छे कर्म करते हैं, तो उनके लिए कभी ख़त्म न होने वाला इनाम [reward] होगा। (25)
 
 
 
नोट: 

1: क़यामत का बयान है।

 

3: बताया जाता है कि क़यामत में ज़मीन को रबर की तरह खींचकर बड़ा कर दिया जाएगा, ताकि उसमें सभी अगले-पिछले लोग समा सकें।

 

4: ज़मीन के भीतर जो कुछ है, यानी मरे पड़े लोग और जो खनिज-पदार्थ हैं, सब बाहर निकाल दिए जाएंंगे।

 

6: जो अच्छे कर्म करनेवाले हैं, वे अल्लाह के हुक्म को मानने में मेहनत करते रहते हैं, और जो दुनिया की मुहब्बत रखते हैं, वे भी दुनिया के लाभ हासिल करने के लिए मेहनत करते रहते हैं। आख़िर में सबको अल्लाह के पास ही पहुँचना है।

 

10: सूरह अल-हाक़्क़ा (69: 25) में कहा गया है कि बुरे लोगों को उनके कर्मों का लेखा-जोखा बायें हाथ में दिया जाएगा। यहाँ बताया गया है कि बायें हाथ में पीछे की तरफ़ से दिया जाएगा।

 

17: सूरज डूबने के समय की लाली, रात और चांद की कसम खाई गई है। ये सारी चीजें अल्लाह के हुक्म के अनुसार एक हालत से दूसरी हालत में बदलती रहती हैं, उनकी कसम खाकर यह कहा गया है कि इंसान भी एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल तक सफ़र करता रहेगा, यहाँ तक कि  अल्लाह से जा मिलेगा।

 

19: इंसान अपने जीवन में विभिन्न चरणों से गुज़रता है। इसके अलावा उसकी सोच में भी बराबर बदलाव आता रहता है।

 

23: एक मतलब तो यह हो सकता है कि वे जो भी कर्म करके जमा कर रहे हैं, उन्हें अल्लाह जानता है। दूसरा मतलब यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने दिलों में जो बातें छुपा रखी हैं, उन्हें भी अल्लाह अच्छी तरह जानता है।

 

 

 


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