Saturday, July 4, 2015

सूरह 101 :अल क़ारियह [तोड़-फोड़ कर रख देनेवाली धमाकेदार टक्कर / The Crashing Blow]

 

सूरह 101: अल-क़ारियह  

[तोड़-फोड़कर रख देने वाली धमाकेदार टक्कर / The Crashing Blow]

 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान हैअत्यंत दयावान है

(ज़मीन और आसमान की सारी कायनात को) "तोड़-फोड़कर रख देने वाली धमाकेदार टक्कर!" (1)

वह (हर चीज़ को) तोड़-फोड़कर रख देने वाली धमाकेदार टक्कर (की घटना) क्या है? (2)

और आपको क्या मालूम कि उस "धमाकेदार टक्कर" का मतलब क्या है?  (3)

(इसका मतलब क़यामत का) वह दिन हैजिस दिन (सारे) लोग (हश्र के मैदान में) फतिंगों [moth] की तरह इधर-उधर बिखरे हुए होंगे (4)

और पहाड़ रंग-बिरंग की धुनी हुई ऊन [tufts of wool] की तरह हो जाएँगे,  (5)

तो वह आदमी जिसके (अच्छे कर्मों) के पल्ले भारी होंगे,  (6)

उसका जीवन मनपसंद खुशी में होगा,  (7)

मगर जिस आदमी के (अच्छे कर्मों) के पल्ले हल्के होंगे,  (8)

तो उसका ठिकाना “हाविया” [बिना तल का गहरा गड्ढा/ Bottomless Pit] होगा------  (9)

और आप क्या समझे कि “हाविया” क्या है?----  (10)

(जहन्नम की) एक सख़्त दहकती हुई आग (का बहुत ही गहरा गड्ढा) है!  (11)












 

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