सूरह 113: अल-फ़लक़
[सुबह-सवेरे, Daybreak]
अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
[ऐ रसूल], आप कह दें कि “मैं सुबह-सवेरे के रब की पनाह [शरण] माँगता हूँ (1)
हर उस चीज़ की बुराई (और नुक़्सान) से जो उसने पैदा की है, (2)
और (ख़ास करके) अंधेरी रात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए, (3)
और गाँठों [गिरहों, Knots] में फूँक मारने वाली जादूगरनियों (और जादूगरों) की बुराई से, (4)
और हर हसद-जलन [ईर्ष्या] करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।” (5)
नोट:
1: यह आख़िरी दो सूरह उस समय उतरी थीं जब कुछ यहूदियों ने मुहम्मद (सल्ल) पर जादू करने की कोशिश की थी, और उसके कुछ प्रभाव आप पर ज़ाहिर भी हुए थे। इन दोनों सूरह में आपको जादू-टोने से बचने के लिए अल्लाह से पनाह माँगने को कहा गया है। कई हदीसों से पता चलता है कि इन दो सूरह को पढ़कर फूँकने से जादू का असर ख़त्म हो जाता है।
3: आम तौर पर जादूगरों की कार्रवाइयाँ रात के अंधेरों में हुआ करती हैं, इसीलिए अँधेरी रात की बुराइयों से भी पनाह माँगी गई है।
4: ऐस मर्द या औरत, जो धागे के गंडे बनाकर उसमें गाँठें लगाते जाते थे और उन पर कुछ पढ़-पढ़कर फूँकते रहते थे और इस तरह जादू कर देते थे, उनकी बुराइयों से भी पनाह माँगी गई है।
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