सूरह 104: अल-हुमज़ह
[पीठ-पीछे बुराई करनेवाला, The Backbiter]
अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
हर उस आदमी के लिए तबाही है, जो (मुँह पर) ताना देने वाला और पीठ-पीछे दूसरों की बुराई करने वाला हो, (1)
(बड़ी ख़राबी है उस आदमी के लिए भी) जो माल को जमा करता हो और गिन-गिनकर रखता हो, (जायज़ और नाजायज़ माल का हिसाब किए बिना), (2)
वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा। (3)
हरगिज़ नहीं! वह तो ज़रूर चूर-चूरकर देने वाली चीज़ [हुतमा] में झोंक दिया जाएगा! (4)
और आपको क्या मालूम कि "हुतमा" क्या है? (5)
वह अल्लाह की भड़काई हुई आग है, (6)
जो (तलवे से लगी तो) दिलों तक चढ़ जाएगी। (7)
बेशक वह (आग) उन लोगों को चारों तरफ़ से अपने घेरे में ले लेगी, (8)
जबकि वह (भड़कते हुए) लम्बे-लम्बे शोलों में घिरे हुए होंगे। (9)
नोट:
1: पीठ पीछे दूसरों की बुराई करने [ग़ीबत] को क़ुरआन में घिनौना गुनाह कहा है, और किसी के मुँह पर ताने
देना जिसे उसका दिल दुखे, उससे भी बड़ा गुनाह है।
3: जायज़ तरीक़े से धन कमाना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन उसकी ऐसी मुहब्बत कि हर समय आदमी उसी के फेर में लगा रहे, उसे गुनाह करने पर उकसाता
है। और किसी आदमी पर अगर धन की मुहब्बत इस तरह सवार हो जाए कि वह समझने लगे कि उसकी
हर मुश्किल धन से ही दूर होगी, और हर समय मौत को भूलकर दुनियादारी की योजनाएं बनाता रहे जैसे कि यह धन उसे हमेशा ज़िंदा रखेगा, तो यह भारी भूल है।
No comments:
Post a Comment