सूरह 112: अल-इख़्लास
[ईमान की शुद्धता, Purity of Faith]
अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
[ऐ रसूल] आप कह दें, “अल्लाह हर तरह से एक है, (1)
अल्लाह ही ऐसा है कि उसे किसी की ज़रूरत नहीं [self sufficient], मगर सब अपनी ज़रूरतों के लिए उस पर निर्भर हैं (और वह हमेशा बाक़ी रहनेवाला [eternal] है, (2)
न उसका कोई बाल-बच्चा है, और न ही उसको किसी ने पैदा किया है। (3)
और उसके जोड़ का कोई नहीं है [Unique]।” (4)
नोट:
1: कुछ काफ़िरों ने मुहम्मद (सल्ल.) से पूछा था कि आप जिस ख़ुदा की इबादत करते हैं, वह कैसा है? उसके ख़ानदान का परिचय कराएं। इसके जवाब में यह सूरह उतरी।
अल्लाह का “हर तरह से एक होने” का मतलब यह है कि वह अपनी ज़ात में भी एक है, और अपनी विशेषताओं में भी एक है।
3: अरब के काफिर लोग फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे, या ईसाई और यहूदी लोग हज़रत ईसा (अलै.) या उज़ैर (अलै.) को अल्लाह का बेटा मानते थे।
4: इस सूरह की चार छोटी आयतों में अल्लाह के बारे में बहुत ही सुंदर और ठोस तरीक़े से वर्णन किया गया है। पहली आयत में उन लोगों की सोच को रद्द किया गया है जो एक से ज़्यादा ख़ुदा को मानते हैं, दूसरी आयत में उन लोगों की सोच को रद्द किया गया है जो अल्लाह को मानने के बावजूद किसी और को भी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने वाला मानते हैं, तीसरी आयत में उन लोगों की सोच रद्द की गई है जो अल्लाह के लिए औलाद मानते हैं, और चौथी आयत में उन लोगों का रद्द किया गया है जो अल्लाह की किसी भी विशेषता में किसी और की बराबरी के क़ायल हैं, जैसे कुछ मजूसियों [Magians] का कहना यह था कि रौशनी को पैदा करने वाला कोई और है, और अँधेरे को बनाने वाला कोई और है। इस तरह इस छोटी सी सूरह में अल्लाह की ख़ुदायी में किसी भी साझेदारी [Partnership] को पूरी तरह रद्द करके शुद्ध तौहीद पर ज़ोर दिया गया है। एक हदीस में इस सूरह को क़ुरआन का एक-तिहाई हिस्सा क़रार दिया है।
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