Thursday, July 2, 2015

सूरह 98: अल बैय्यिनह [स्पष्ट प्रमाण, Clear Evidence]

सूरह 98: अल-बैय्यिनह  

[स्पष्ट प्रमाण, Clear Evidence]


01-05: स्पष्ट प्रमाण 

06-08: ईमानवालों और विश्वास न करनेवालों का अंजाम

 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है

किताबवालों [यहूदी व ईसाई] में और मुशरिकों [बहुदेववादियों] में से जो लोग सच्चाई से इंकार करनेवाले [काफ़िर] थे, वे उस समय तक अपने तरीक़े छोड़ने वाले न थे जब तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण न आ जाता,  (1)

अल्लाह की तरफ़ से (संदेश पहुँचाने वाले) एक रसूल के रूप में, जो (उन्हें) पवित्र किताब के पन्नों को पढ़कर सुनाए,  (2)

जिनमें सीधी, सच्ची बातें लिखी हुई हों। (3)

(इसके बावजूद) जिन्हें आसमानी किताब दी गयी थी, उनके पास (रसूल और क़ुरआन के रूप में) इतने साफ़ प्रमाण आ जाने के बाद भी वे आपस में बँट गये,  (4)

हालाँकि उन्हें तो बस यही हुक्म दिया गया था कि वे केवल अल्लाह की ही बंदगी करें, एक सच्चे ईमानवाले की तरह अपने दीन को पूरी भक्ति से केवल उसी के लिए समर्पित करें, और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करें और ज़कात [Alms] दिया करें, कि यही सच्चा दीन है।  (5)

किताबवालों में और मुशरिक लोगों [Idolaters] में से जो लोग (सच्चाई पर) विश्वास न करने पर अड़े रहे, वे (सभी) जहन्नम की आग में डाले जाएंगे, जहाँ वे हमेशा पड़े रहेंगे। यही लोग पैदा किए गए सभी प्राणियों में सबसे बुरे हैं।  (6)


बेशक जो लोग ईमान लाए हैं, और अच्छे कर्म करते रहे हैं, यही लोग पैदा किए गए सभी प्राणियों में सबसे बेहतर हैं।  (7)

उनका इनाम उनके रब के यहाँ वह सदाबहार जन्नतें [बाग़] हैं जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, और वे उनमें सदा के लिए रहेंगे। अल्लाह उनसे ख़ुश होगा, और वे लोग उससे ख़ुश होंगे। ये (सब कुछ) उन लोगों के लिए ख़ास है जो अपने दिल में अपने रब का डर रखते हों। (8)



नोट: 

4: यहाँ उन किताबवालों की बात हो रही है जो किसी स्पष्ट प्रमाण के इंतज़ार में थे,  मगर जब मुहम्मद (सल्ल) के नबी होने के पक्के प्रमाण सामने आ गए, तब भी उनलोगों ने विश्वास नहीं किया, और केवल अपनी हठधर्मी के कारण आपकी बात नहीं मानी और अलग रास्ता अपना लिया। देखें 3:19, 105; 23:53; 42:13-14. 

 

 

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