सूरह 108: अल-कौसर
[बहुत ज़्यादा भलाई, Abundance]
जब पैग़म्बर साहब के आख़िरी बेटे की मौत हो गई, तो उनके विरोधियों ने जो उनसे बहुत नफ़रत करते थे, तंज़ करना शुरू किया कि अब वह "अबतर" हो गए यानी अब उनकी नस्ल आगे नहीं चल पाएगी और कुछ दिनों बाद वह भुला दिए जाएंगे। इस मक्की सूरह में उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया है और उनके दुश्मनों को जवाब दिया गया है।
विषय:
01-03: पैग़म्बर (सल्ल) के लिए अच्छी ख़बर
अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
बेशक [ऐ रसूल!], हमने आपको बहुत ज़्यादा भलाई [abundance] (और नेमतें) दी हैं ------ (1)
सो, आप केवल अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ा करें और उसी के लिए क़ुर्बानी दिया करें------- (2)
वह जो आपसे नफ़रत करता है, असल में वही अपनी जड़ से कटा हुआ होगा (जिसका न तो कोई नाम बाक़ी रहेगा और न ही उसके ख़ानदान को कोई जानेगा)। (3)
नोट:
1: "कौसर" का मतलब कुछ विद्वानों ने जन्नत की एक नदी से भी लिया है। कुछ कहते हैं कि यह उनके पीछे चलनेवालों को कहा गया है जो बहुत अधिक थे। कुछ कहते हैं कि 'बहुत सारी आयतों' के उतरने को "कौसर" कहा गया है
3: अरब के लोग ऐसे आदमी को “अबतर” कहते थे जिसकी नस्ल आगे न चले यानी जिसका कोई लड़का न हो। जब मुहम्मद (सल्ल) के बेटे की मौत हो गई, तो आपके दुश्मनों ने ताना मारते हुए आपको “अबतर” यानी ‘जड़ से कटा हुआ’ कहना शुरू किया जिसका कोई नाम लेने वाला न होगा।
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