Tuesday, March 29, 2022

Surah/सूरह 87: Al-Aala/अल-आला [सबसे ऊँचा / The Most High]

 सूरह 87: अल-आला 

[सबसे ऊँचा / The Most High]


यह एक मक्की सूरह है जिसके शुरू में ही कहा गया है कि अल्लाह की महानता का गुणगान करो। रसूल को यह आश्वासन दिया गया है कि अल्लाह उनकी ज़रूर मदद करेगा और उन्हें बिना चिंता किए अपने मिशन में लगे रहना चाहिए। यह दुनिया थोड़े समय के लिए ही है और इसे हरी-भरी वनस्पतियों से समझाया गया है कि थोड़े समय के बात हरियाली ख़त्म हो जाती है (आयत 4-5).  



विषय:

01-13: अल्लाह क़ुरआन का पढ़ना और उस पर चलना आसान कर देगा 

14-19: आने वाली [आख़िरत] ज़िंदगी इस जीवन से कहीं अच्छी है 


अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है

[ऐ रसूल], अपने रब के नाम की बड़ाई बयान करें जो सबसे ऊँचा है, (1)

जिसने (हर चीज़ को, ठीक जैसी ज़रूरत थी) सही अनुपात [due proportion] में पैदा किया;  (2)

और जिसने (हर एक चीज़ के लिए) क़ानून ठहरा दिया, और फिर (इसे अपने-अपने सिस्टम के अनुसार रहने और चलने का) रास्ता भी बता दिया;  (3)

और जिसने (धरती से) हरा-हरा चारा [Green pastures] उगाया  (4)
 
फिर उसे सूखा काला कूड़ा बना दिया।  (5)



[ए रसूल!], हम आपको (इस तरह से क़ुरआन) पढ़ाएँगे कि आप (कभी) नहीं भूलेंगे -----  (6)

जब तक अल्लाह न चाहे; सचमुच वह उन चीज़ों को भी जानता है जो सबके सामने हैं, और उन्हें भी जो छुपी हुई हैं -------  (7)

और हम आपको आसान तरीक़ा बता देंगे।  (8)


इसलिए आप नसीहत देते रहिए, अगर (सुनने वालों को) इस नसीहत [Reminding] से लाभ हो ------  (9)

लेकिन नसीहत तो वही क़बूल [स्वीकार] करेगा जिसके दिल में अल्लाह का डर होगा,  (10)

मगर जो बेहद बदमाश आदमी [wicked person] होगा, वह इस (नसीहत) पर कोई ध्यान नहीं देगा,  (11)

जो (क़यामत के दिन) सबसे बड़ी आग में प्रवेश करेगा,  (12)

जहाँ न तो वह मर सकेगा और न जी सकेगा।  (13)



बेशक वही कामयाब हुआ जिसने (पाप की गंदगियों से) अपने को साफ़ रखा,  (14)

और अपने रब के नाम को याद करता रहा और (पाबंदी से) नमाज़ पढ़ता रहा।  (15)

लेकिन इसके बावजूद, तुम [लोग] (अल्लाह से लगाव बढ़ाने के बजाय) सांसारिक जीवन (के आनंद) को अपना लेते हो,  (16)

हालाँकि आख़िरत [परलोक/ hereafter] (की राहत और वहाँ का आनंद) बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है। (17)

बेशक यह (शिक्षा) पहले की किताबों [Scriptures] में (भी लिखी हुई मौजूद) हैं,  (18)

(जो) इबराहीम [Abraham] और मूसा [Moses] की किताबें [scriptures] हैं। (19)
 
 
 
 
नोट: 


5: इस दुनिया में अल्लाह ने हर चीज़ ऐसी बनायी है कि कुछ अवधि अपनी बहार दिखाने के बाद उसकी सूरत बिगड़ जाती है और फिर उसका अंत हो जाता है।

 

7: मुहम्मद (सल्ल.) को इस बात की चिंता होती थी कि कहीं वह क़ुरआन का कुछ हिस्सा भूल न जाएं। इस आयत में अल्लाह ने आपको आश्वस्त किया है कि वह आपको भूलने नहीं देंगे। हाँअल्लाह ख़ुद ही अपने किसी पहले वाले हुक्म को अगर रद्द करना चाहेतो आपको इजाज़त थी कि आप चाहेंंतो उसे भूल जाएं। देखें सूरह बक़रा (2: 106)


8: या हम आपके लिए चीज़ों को आसान कर देंगे, यह क़ुरआन को पढ़कर सुनाने के बारे में है।


14: अपने आपको साफ़ रखने का तरीक़ा यह है कि ज़्यादा से ज़्यादा दान देकर ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद की जाए।   

 















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