Tuesday, March 29, 2022

 सूरह 99: अज़-ज़िलज़ाल

[अंतिम भूकंप/ The Earthquake]


यह एक मक्की सूरह है जिसमें फ़ैसले के दिन के कई दृश्य दिखाए गए हैं, जब कर्मों के बही-खाते खोल दिए जाएंगे और उनका हिसाब-किताब होगा। सूरह 81, 82, 101 और दूसरी सूरतों से भी तुलना करें।

  


विषय:


01-08: फ़ैसले के दिन की दहशत


 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान हैअत्यंत दयावान है

जब ज़मीन बड़े ज़ोरों के साथ (आख़िरी) भूकंप से झिंझोड़ दी जाएगी, (1)

जब धरती अपने अन्दर के (सब) बोझ [मुर्दे] निकाल बाहर कर डालेगी,  (2)

जब आदमी पुकार उठेगा, “इस [धरती] को आख़िर क्या हो गया है”? (कि इतनी ज़ोर से काँप रही है);  (3)

उस दिनवह [धरती] अपने सब हालात ख़ुद बता देगी,  (4)

क्योंकि तुम्हारा रब उसको (ऐसा ही करने का) हुक्म देगा।  (5)

उस दिनलोग अलग-अलग टोली में (अपनी क़ब्रों से) निकलकर आएंगेताकि उन्हें उनके किए गए कर्मों को दिखाया जाए: (6)

जिस किसी ने कण-भर भी अच्छाई की होगीवह इसे देख लेगा, (7)

और जिस किसी ने कण-भर भी बुराई की होगीतो वह उसे (भी) देख लेगा। (8)



नोट:

2: यानी सारे मुर्देऔर साथ में सारे खनिज-पदार्थ और ख़ज़ाने जो ज़मीन के अंदर गड़े हुए हैंसब बाहर आ जाएंगे। एक हदीस में है कि जिस किसी ने दौलत के चलते किसी को क़त्ल किया होगाया रिश्तेदारों का हक़ मारा होगाया चोरी की होगीवह सारे माल को देखकर कहेगा कि ये है वह माल जिसके चलते मैंने ये गुनाह किए थे। फिर कोई उस सोने-चाँदी की तरफ़ ध्यान नहीं देगा।

8: यहाँ बुराई का मतलब ऐसी बुराइयों से है जिसके लिए तौबा न की गई होक्योंकि सच्ची तौबा से गुनाह माफ़ हो जाते हैं। सच्ची तौबा में यह बात भी शामिल है कि जिस गुनाह की भरपाई मुमकिन होउसकी भरपाई कर दी जाएउदाहरण के लिए किसी का हक़ मारा थातो उसे दे दिया जाएया उससे माफ़ करा लिया जाएया कोई फ़र्ज़ नमाज़ छूटी हुई थीउसे पढ‌ लिया जाए आदि। 

 

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