सूरह 84: अल-इंशिक़ाक़
यह एक मक्की सूरह है जिससे रसूल और उनके अनुयायियों के दिल मज़बूत हुए जब यह पता चला कि जिन लोगों ने पहले के ईमानवालों के साथ बहुत ज़ुल्म किया था, उनका कैसा बुरा अंजाम होने वाला है। कहा जाता है कि सन 523-24 ई. में नजरान (यमन और अरब की सरहद पर स्थित) के ईसाइयों के साथ बुतपरस्तों (या यहूदियों) ने बड़ा ज़ुल्म किया था और उन्हें आग की खायी में फेंक दिया था। उन ज़ालिमों की सज़ा यह होगी कि जहन्नम की आग में जलाए जाएंगे। इस सूरह का नाम अल्लाह की ताक़त को दर्शाता है जो सारे ब्रह्मांड पर छायी हुई है, आसमान के तारों से लेकर शैतानी करनेवालों तक जिनका हवाला इस सूरह में आया है। सचमुच इस पूरी सूरह में देखा जाए तो अल्लाह की बेपनाह ताक़त का ज़िक्र है जो हर चीज़ को अपने घेरे में लिए हुए है।
01-06: क़यामत का दिन
07-15: कर्मों का हिसाब-किताब
16-19: आदमी का एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक बढ़ना
20-25: क़ुरआन को ठुकरा देने वालों को चेतावनी
1: क़यामत का बयान है।
3: बताया जाता है कि क़यामत में ज़मीन को रबर की तरह खींचकर बड़ा कर दिया जाएगा, ताकि उसमें सभी अगले-पिछले लोग समा सकें।
4: ज़मीन के भीतर जो कुछ है, यानी मरे पड़े लोग और जो खनिज-पदार्थ हैं, सब बाहर निकाल दिए जाएंंगे।
6: जो अच्छे कर्म करनेवाले हैं, वे अल्लाह के हुक्म को मानने में मेहनत करते रहते हैं, और जो दुनिया की मुहब्बत रखते हैं, वे भी दुनिया के लाभ हासिल करने के लिए मेहनत करते रहते हैं। आख़िर में सबको अल्लाह के पास ही पहुँचना है।
10: सूरह अल-हाक़्क़ा (69: 25) में कहा गया है कि बुरे लोगों को उनके कर्मों का लेखा-जोखा बायें हाथ में दिया जाएगा। यहाँ बताया गया है कि बायें हाथ में पीछे की तरफ़ से दिया जाएगा।
16-19: इस सूरह का संदर्भ क़यामत में कर्मों के हिसाब-किताब के लिए दोबारा ऊठाया जाना है। यहाँ सूरज डूबने के समय की लाली, रात और चौदहवीं के चांद की क़सम खायी गई है, जो एक दिन के समय के विभिन्न चरणों को दर्शाता है। एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव में जो क्रमिक बदलाव होता है वह प्राकृतिक है और हमेशा वैसे ही होता है, ठीक ऐसे ही जो लोग क़यामत में दोबारा उठाए जाने को मानने से इंकार करते हैं, उनकी हालत में भी क्रमिक बदलाव होगा, पहले वह मर जाएंगे, फिर क़ब्र में जाएंगे, और फिर ज़िंदा उठाए जाएंगे, तब वह उस हक़ीक़त को देख लेंगे जिसका अभी इंकार कर रहे हैं। वे केवल ज़िंदगी (बचपन, जवानी, बुढ़ापा) और मौत तक के चरणों को देखते और अनुभव करते हैं, मगर मरने के बाद के चरण पर विश्वास नहीं करते। यहाँ क़सम खाकर यह कहा गया है कि जो अल्लाह इस दुनिया में ज़िंदगी और मौत तक के चरणों में क्रमिक बदलाव लाता है, वही मरने के बाद के चरणों में भी बदलाव लाएगा और ऐसा करने में वह पूरी तरह सक्षम है।
23: एक मतलब तो यह हो सकता है कि वे जो भी कर्म करके जमा कर रहे हैं, उन्हें अल्लाह जानता है। दूसरा मतलब यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने दिलों में जो बातें छुपा रखी हैं, उन्हें भी अल्लाह अच्छी तरह जानता है।
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