Tuesday, March 29, 2022

Surah/सूरह 84: Al-Inshiqaq/अल-इंशिक़ाक़ [फट पड़ना / Ripped Apart]

 सूरह 84: अल-इंशिक़ाक़

[फट पड़ना / Ripped Apart]


यह एक मक्की सूरह है जिससे रसूल और उनके अनुयायियों के दिल मज़बूत हुए जब यह पता चला कि जिन लोगों ने पहले के ईमानवालों के साथ बहुत ज़ुल्म किया था, उनका कैसा बुरा अंजाम होने वाला है। कहा जाता है कि सन 523-24 ई. में नजरान (यमन और अरब की सरहद पर स्थित) के ईसाइयों के साथ बुतपरस्तों (या यहूदियों) ने बड़ा ज़ुल्म किया था और उन्हें आग की खायी में फेंक दिया था। उन ज़ालिमों की सज़ा यह होगी कि जहन्नम की आग में जलाए जाएंगे। इस सूरह का नाम अल्लाह की ताक़त को दर्शाता है जो सारे ब्रह्मांड पर छायी हुई है, आसमान के तारों से लेकर शैतानी करनेवालों तक जिनका हवाला इस सूरह में आया है। सचमुच इस पूरी सूरह में देखा जाए तो अल्लाह की बेपनाह ताक़त का ज़िक्र है जो हर चीज़ को अपने घेरे में लिए हुए है। 



विषय:

01-06: क़यामत का दिन

07-15: कर्मों का हिसाब-किताब 

16-19: आदमी का एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक बढ़ना 

20-25: क़ुरआन को ठुकरा देने वालों को चेतावनी



अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है

जब आसमान फट पड़ेगा,  (1)

अपने रब का आदेश मानते हुए, कि यही करना उस (आसमान) के लिए ज़रूरी होगा,  (2)
  
जब ज़मीन (खींच करके) फैला दी जाएगी, (3)

तो जो कुछ उसके अंदर है उसे बाहर फेंक देगी, और ख़ाली हो जाएगी, (4)


अपने रब का आदेश मानते हुए, कि यही करना उस (ज़मीन) के लिए ज़रूरी होगा,  (5)


ऐ इंसान! तू अपने रब तक पहुंचने में (ज़िंदगी भर) भारी मेहनत करता रहा, अंतत: तू उस (रब) से जा मिलेगा: (6)


तो जिस आदमी के कर्मों का लेखा-जोखा उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा, (7)


तो उससे आसान-सा हिसाब लिया जाएगा (8)


और वह अपने घरवालों के पास खुशी-खुशी लौटेगा।  (9)


मगर जिस किसी को उसका लेखा-जोखा उसकी पीठ के पीछे से (बायें हाथ में) दिया जाएगा, (10)


तो वह अपनी बर्बादी को पुकार उठेगा ------ (11)


वह जहन्न्म की भड़कती हुई आग में जलेगा। (12)


वह (दुनिया में) अपने परिवार के साथ हँसी-ख़ुशी रहा करता था। (13)


उसको ऐसा लगता था कि (अल्लाह के सामने) वह कभी लौटकर नहीं जाएगा ---- (14)


सचमुच! (वह ज़रूर लौटेगा!) उसका रब उसको देख रहा था। (15)


मुझे क़सम है सूरज डूबने के समय की लाली की,  (16)


क़सम है रात की, और उन चीजों की जिन्हें वह ढक लेती है, (17)


और क़सम है चाँद की, जब वह (बढ़ते-बढ़ते) पूरा दिखाई देता है, (18)

तुम (जीवन के) एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक इसी तरह से बढ़ते जाओगे।  (19)


तो वे (सच्चाई पर) विश्वास क्यों नहीं करते? (20)

जब उनके सामने कुरआन पढ़ी जाती है, तो वे (अल्लाह के सामने) सज्दे में क्यों नहीं झुक जाते? (21)


नहीं! बल्कि विश्वास न करनेवाले [काफ़िर] लोग क़ुरआन को ठुकरा देते हैं ---- (22)


अल्लाह बेहतर जानता है जो कुछ इन लोगों ने अपने अंदर छिपा रखा है---- (23)


सो आप उन्हें दर्दनाक यातना की ख़ुशख़बरी सुना दें।  (24)


मगर जो लोग विश्वास रखते हैं, और अच्छे कर्म करते हैं, तो उनके लिए कभी ख़त्म न होने वाला इनाम [reward] होगा। (25)
 
 
 
नोट: 

1: क़यामत का बयान है।

 

3: बताया जाता है कि क़यामत में ज़मीन को रबर की तरह खींचकर बड़ा कर दिया जाएगाताकि उसमें सभी अगले-पिछले लोग समा सकें।

 

4: ज़मीन के भीतर जो कुछ हैयानी मरे पड़े लोग और जो खनिज-पदार्थ हैंसब बाहर निकाल दिए जाएंंगे।

 

6: जो अच्छे कर्म करनेवाले हैंवे अल्लाह के हुक्म को मानने में मेहनत करते रहते हैंऔर जो दुनिया की मुहब्बत रखते हैंवे भी दुनिया के लाभ हासिल करने के लिए मेहनत करते रहते हैं। आख़िर में सबको अल्लाह के पास ही पहुँचना है।

 

10: सूरह अल-हाक़्क़ा (69: 25) में कहा गया है कि बुरे लोगों को उनके कर्मों का लेखा-जोखा बायें हाथ में दिया जाएगा। यहाँ बताया गया है कि बायें हाथ में पीछे की तरफ़ से दिया जाएगा।

 

16-19: इस सूरह का संदर्भ क़यामत में कर्मों के हिसाब-किताब के लिए दोबारा ऊठाया जाना है। यहाँ सूरज डूबने के समय की लालीरात और चौदहवीं के चांद की क़सम खायी  गई है, जो एक दिन के समय के विभिन्न चरणों को दर्शाता है। एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव में जो क्रमिक बदलाव होता है वह प्राकृतिक है और हमेशा वैसे ही होता है, ठीक ऐसे ही जो लोग क़यामत में दोबारा उठाए जाने को मानने से इंकार करते हैं, उनकी हालत में भी क्रमिक बदलाव होगा, पहले वह मर जाएंगे, फिर क़ब्र में जाएंगे, और फिर ज़िंदा उठाए जाएंगे, तब वह उस हक़ीक़त को देख लेंगे जिसका अभी इंकार कर रहे हैं। वे केवल ज़िंदगी (बचपन, जवानी, बुढ़ापा) और मौत तक के चरणों को देखते और अनुभव करते हैं, मगर मरने के बाद के चरण पर विश्वास नहीं करते। यहाँ क़सम खाकर यह कहा गया है कि जो अल्लाह इस दुनिया में ज़िंदगी और मौत तक के चरणों में क्रमिक बदलाव लाता है, वही मरने के बाद के चरणों में भी बदलाव लाएगा और ऐसा करने में वह पूरी तरह सक्षम है। 

 

23: एक मतलब तो यह हो सकता है कि वे जो भी कर्म करके जमा कर रहे हैंउन्हें अल्लाह जानता है। दूसरा मतलब यह भी हो सकता है कि उन्होंने अपने दिलों में जो बातें छुपा रखी हैंउन्हें भी अल्लाह अच्छी तरह जानता है।

 

 

 


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