Tuesday, March 29, 2022

 सूरह 112: अल-इख़्लास

[ईमान की शुद्धता, Purity of Faith]


यह सूरह इस मामले में बाक़ी सारी सूरतों से अलग है कि इसमें सूरह का नाम "इख़्लास" पूरी आयतों में कहीं भी नहीं आया है। इख़्लास का मतलब है अपने मज़हब के प्रति ईमानदारी और एक सच्चे ख़ुदा की पूरी भक्ति। इस तरह, यह सूरह बहुदेववाद, मूर्तिपूजा, तीन में से एक ख़ुदा, नास्तिकता जैसी सभी चीज़ों का खंडन करती है। केवल एक अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, और बुराइयों से बचने के लिए उसी को पुकारना चाहिए जो आगे की दो सूरह में बताया गया है। इस्लाम में इस विषय के महत्व को देखते हुए रसूल ने कहा था कि यह सूरह इतनी छोटी होने के बावजूद एक-तिहाई क़ुरआन के बराबर है।  

  

 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान हैअत्यंत दयावान है

[ऐ रसूलआप कह दें, “अल्लाह हर तरह से एक है, (1)     

अल्लाह ही ऐसा है कि उसे किसी की ज़रूरत नहीं [self sufficient], मगर सब अपनी ज़रूरतों के लिए उस पर निर्भर हैं (और वह हमेशा बाक़ी रहनेवाला [eternal] है  (2) 

न उसका कोई बाल-बच्चा हैऔर न ही उसको किसी ने पैदा किया है।  (3)

और उसके जोड़ का कोई नहीं है [Unique]।”  (4)

 

 

नोट:

1: कुछ काफ़िरों ने मुहम्मद (सल्ल.) से पूछा था कि आप जिस ख़ुदा की इबादत करते हैंवह कैसा हैउसके ख़ानदान का परिचय कराएं। इसके जवाब में यह सूरह उतरी।

अल्लाह का “हर तरह से एक होने” का मतलब यह है कि वह अपनी ज़ात में भी एक हैऔर अपनी विशेषताओं में भी एक है।

3: अरब के काफिर लोग फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थेया ईसाई और यहूदी लोग हज़रत ईसा (अलै.) या उज़ैर (अलै.) को अल्लाह का बेटा मानते थे।

4: इस सूरह की चार छोटी आयतों में अल्लाह के बारे में बहुत ही सुंदर और ठोस तरीक़े से वर्णन  किया गया है। पहली आयत में उन लोगों की सोच को रद्द किया गया है जो एक से ज़्यादा ख़ुदा को मानते हैंदूसरी आयत में उन लोगों की सोच को रद्द किया गया है जो अल्लाह को मानने के बावजूद किसी और को भी अपनी ज़रूरतों को पूरा करने वाला मानते हैंतीसरी आयत में उन लोगों  की सोच रद्द की गई है जो अल्लाह के लिए औलाद मानते हैंऔर चौथी आयत में उन लोगों का रद्द किया गया है जो अल्लाह की किसी भी विशेषता में किसी और की बराबरी के क़ायल हैंजैसे कुछ मजूसियों [Magians] का कहना यह था कि रौशनी को पैदा करने वाला कोई और हैऔर अँधेरे को बनाने वाला कोई और है। इस तरह इस छोटी सी सूरह में अल्लाह की ख़ुदायी में किसी भी साझेदारी [Partnership] को पूरी तरह रद्द करके शुद्ध तौहीद पर ज़ोर दिया गया है। एक हदीस में इस सूरह को क़ुरआन का एक-तिहाई हिस्सा क़रार दिया है।  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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