Tuesday, March 29, 2022

 सूरह 98: अल-बैय्यिनह  

[स्पष्ट प्रमाण, Clear Evidence]


यह एक मदनी सूरह है, इसका नाम उस 'स्पष्ट प्रमाण' पर रखा गया है जिसकी मांग विश्वास करने वाले बराबर करते रहते थे। मगर स्पष्ट प्रमाण के आने के बावजूद अब जो वे अविश्वास पर अड़े रहे, तो उन्हें भयानक यातना झेलनी होगी। इसमें "ईमान" के बुनियादी सिद्धांतों को बताया गया है, और जहन्नम की आग की तुलना जन्नत के बाग़ों में हमेशा रहने वालों के परम आनंद से की गई है। 


विषय: 

01-05: स्पष्ट प्रमाण 

06-08: ईमानवालों और विश्वास न करनेवालों का अंजाम


 

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान हैअत्यंत दयावान है

किताबवालों [यहूदी व ईसाई] में और मुशरिकों [बहुदेववादियों] में से जो लोग सच्चाई से इंकार करनेवाले [काफ़िर] थेवे उस समय तक अपने तरीक़े छोड़ने वाले न थे जब तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण न आ जाता,  (1)

अल्लाह की तरफ़ से (संदेश पहुँचाने वाले) एक रसूल के रूप मेंजो (उन्हें) पवित्र किताब के पन्नों को पढ़कर सुनाए,  (2)

जिनमें सीधीसच्ची बातें लिखी हुई हों। (3)

(इसके बावजूद) जिन्हें आसमानी किताब दी गयी थीउनके पास (रसूल और क़ुरआन के रूप में) इतने साफ़ प्रमाण आ जाने के बाद भी वे आपस में बँट गये,  (4)

हालाँकि उन्हें तो बस यही हुक्म दिया गया था कि वे केवल अल्लाह की ही बंदगी करेंएक सच्चे ईमानवाले की तरह अपने दीन को पूरी भक्ति से केवल उसी के लिए समर्पित करेंऔर पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करें और ज़कात [Alms] दिया करेंकि यही सच्चा दीन है।  (5)

किताबवालों में और मुशरिक लोगों [Idolaters] में से जो लोग (सच्चाई पर) विश्वास न करने पर अड़े रहेवे (सभी) जहन्नम की आग में डाले जाएंगेजहाँ वे हमेशा पड़े रहेंगे। यही लोग पैदा किए गए सभी प्राणियों में सबसे बुरे हैं।  (6)


बेशक जो लोग ईमान लाए हैंऔर अच्छे कर्म करते रहे हैंयही लोग पैदा किए गए सभी प्राणियों में सबसे बेहतर हैं।  (7)

उनका इनाम उनके रब के यहाँ वह सदाबहार जन्नतें [बाग़] हैं जिनके नीचे से नहरें बहती हैंऔर वे उनमें सदा के लिए रहेंगे। अल्लाह उनसे ख़ुश होगाऔर वे लोग उससे ख़ुश होंगे। ये (सब कुछ) उन लोगों के लिए ख़ास है जो अपने दिल में अपने रब का डर रखते हों। (8)



नोट: 

4: यहाँ उन किताबवालों की बात हो रही है जो किसी स्पष्ट प्रमाण के इंतज़ार में थे,  मगर जब मुहम्मद (सल्ल) के नबी होने के पक्के प्रमाण सामने आ गएतब भी उनलोगों ने विश्वास नहीं कियाऔर केवल अपनी हठधर्मी के कारण आपकी बात नहीं मानी और अलग रास्ता अपना लिया। देखें 3:19, 105; 23:53; 42:13-14. 

 

 

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