Tuesday, March 29, 2022

Surah/सूरह 94: Al-Inshirah /अल-इंशिराह [Expand, दिल का फैलना / Relief, राहत]

 सूरह 94: अल-इंशिराह

  

 [Expand, दिल का फैलना / Relief, राहत] 



यह भी मक्की सूरह है जिसमें लगता है कि पिछली सूरह 93 से आगे बात कही गई है, इसमें भी संबोधन मुहम्मद सल्ल. से ही है और यहाँ उन्हें मक्का शहर में लगातार मदद का फिर से भरोसा दिलाया गया है और उनका उत्साह भी बढ़ाया गया है।  


विषय:  

01-08: रसूल को और ज़्यादा भरोसा दिलाना 

 

   

अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान हैअत्यंत दयावान है

[ रसूलक्या हमने आपके लिए आपका दिल (ज्ञान और समझबूझसेफैला नहीं दिया (जिससे आपको राहत मिल गयी),  (1) 

और हमने आप पर से (नबी होने की शुरूआती ज़िम्मेदारी काबोझ उतार दिया,  (2) 

जिस (बोझने आपकी कमर तोड़ रखी थी,  (3) 

और हमने (आपकी इज़्ज़त इस तरह बढ़ायी किआपको याद किए जाने [remembrance] को ऊँचा दर्जा दे दिया?  (4)

 

तो सचमुच जहाँ कहीं कठिनाई होती हैउसके साथ आसानी भी (आतीहै;  (5) 

निश्चय ही हर कठिनाई के साथ आसानी (भीहोती है।  (6)

 

तो जैसे ही आप (अपने लोगों कीज़िम्मेदारियों से फ़ुर्सत पा लेंतो (अल्लाह की याद  इबादत मेंमेहनत किया करें,  (7) 

और हर चीज़ के लिए अपने रब से ही दिल लगाया करें। (8)

 



नोट:


3: जब हज़रत मुहम्मद (सल्ल) को नबी होने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयीतो शुरुआत में आपने उनका ज़बरदस्त बोझ महसूस कियाइस बोझ की वजह से आप बेचैन रहते थे। लेकिन फिर अल्लाह ने आपको वह हौसला दिया जिसके नतीजे में आपने कठिन-से-कठिन काम बड़े आराम से कर लिए। यहाँ अल्लाह के इसी इनाम का वर्णन है।

4: अल्लाह ने मुहम्मद (सल्ल) के मुबारक नाम को इतना ऊँचा दर्जा दे दिया कि दुनिया में हर जगह आपका नाम अल्लाह के नाम के साथ लिया जाता है, और आपके काम का ज़िक्र करना इबादत का हिस्सा माना जाता है।  

6: मुहम्मद साहब को यहाँ तसल्ली दी गयी है कि शुरु में अल्लाह का संदेश लोगों तक पहुँचाने में जो मुश्किलें आ रही हैंवह जल्द ही आसान हो जाएंगी। इसके साथ ही आम इंसानों को भी यह सबक़ दिया गया है कि जब भी मुश्किल समय आए तो धीरज से काम लें और समझ जाएं कि इसके बाद आसानी का समय भी आएगा।

7: मुहम्मद साहब दिन भर अल्लाह के संदेश को लोगों तक पहुँचाने के काम में व्यस्त रहते थे। हालाँकि यह काम भी इबादत में ही शामिल थापर इसके बावजूद यह कहा गया है कि जब इन कामों से फुर्सत मिल जाएतो असल इबादत (नमाज़ या ज़िक्र आदि) में भी मेहनत करें, इसी से अल्लाह के साथ रिश्ता मज़बूत होता है और हर काम में बरकत पैदा होती है। 

 
 

 
 

 
 

 
 

 
 

 
 

 
 


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