Tuesday, March 29, 2022

Surah/सूरह 86: At-Tariq/अत-तारिक़ [रात को (नज़र) आनेवाला / The Night-Comer]

 सूरह 86: अत-तारिक़ 

[रात को (नज़र) आनेवाला / The Night-Comer]

यह एक मक्की सूरह है। इसमें क़सम खाकर कहा गया है कि जो कुछ भी आदमी करता है, उसको फ़रिश्ते लिख लेते हैं, और यह कि मरे हुए लोगों को दोबारा ज़िंदा उठाना, उन्हें पहली बार पैदा करने से ज़्यादा आसान है। हमारे सामने आने वाली बहुत सारी चीज़ों की मिसाल देकर ध्यान दिलाया गया है:

तेज़ चमकता हुआ तारा, उछलकर निकल जानेवाला वीर्य, कोख से बच्चे का बाहर निकल आना या धरती फाड़कर पौधों का बाहर निकलना। यह सारी मिसालें इसलिए दी गई हैं ताकि लोग समझ सकें कि मरे-पड़े लोग कैसे अपनी क़ब्रों को फाड़कर बाहर निकल आएंगे। एक और क़सम खाकर कहा गया है कि क़ुरआन एक फैसला कर देने वाला संदेश है, और जो अल्लाह के ख़िलाफ़ साज़िश करे तो उसे कड़ी चेतावनी दी गई है। 


विषय:

01-10: हर आदमी को परखा जाएगा

11-14: क़ुरआन का संदेश कोई हँसी-मज़ाक़ की चीज़ नहीं 

15-17: विश्वास न करने वालों को थोड़ी सी ढील दे दें 



अल्लाह के नाम से शुरू जो सब पर मेहरबान है, अत्यंत दयावान है
आसमान (पर फैले हुए अंतरिक्ष) की क़सम, और रात को (नज़र) आने वाले की क़सम -----  (1)
और आपको क्या मालूम कि रात को (नज़र) आने वाला क्या है?  (2)
चमकता हुआ तारा (जो आसमान के अँधेरे को मिटा देता है) ----  (3)
कि कोई जान ऐसी नहीं जिस पर एक निगरानी करनेवाला [watcher] (नियुक्त) नहीं है।  (4)
इसलिए आदमी को सोच-विचार करना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया था?  (5)
वह ज़ोर से उछलते हुए पानी [शुक्राणु/sperm] से पैदा किया गया है,  (6)
फिर वह (माँ की) पीठ (के निचले हिस्से) और सीने की हड्डियों के बीच (कोख में) से गुज़रकर बाहर निकलता है:  (7)
(जिस तरह माँ के कोख से निकलता है, उसी तरह क़ब्र से भी ज़िंदा निकलेगा!) बेशक वह [अल्लाह] इसे दोबारा पैदा करने में पूरी तरह समर्थ है।  (8)
जिस दिन (दिलों में) छुपी बातें सामने आ जाएंगी (और उन्हें परखा जाएगा),  (9)
फिर आदमी के पास न (स्वयं) कोई ताक़त होगी, और न कोई (उसको) मदद करने वाला होगा।  (10)
क़सम है आसमान की और उससे बार-बार होने वाली (मौसमी) बारिश की,   (11)
और ज़मीन की क़सम है जो फट जाती है (और उसमें से पौधे निकल आते हैं, उसी तरह क़यामत के दिन, आदमी ज़मीन फाड़कर बाहर निकल आएगा)। (12)
यह सचमुच एक निर्णायक [decisive] फ़रमान है (जो होकर रहेगा);  (13)
यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे (हँसी-मज़ाक़ के तौर पर) हल्के में लिया जाए।  (14)
वे [काफ़िर लोग] अपनी योजना बनाने और चाल चलने में लगे हुए हैं,  (15)
मगर मैं भी अपनी तदबीर [strategy] में लगा हूँ:  (16)
इसलिए [ऐ रसूल], आप विश्वास न करनेवालों को ढील दे दीजिए, उन्हें थोड़ी सी ढील (और) दे दीजिए।   (17)
 
 
 
 
नोट:
 

1: यहाँ आसमान की क़सम खायी गई है, धरती से ऊपर आसमान ऐसा लगता है मानो वह नीचे सबको देख रहा हो, फिर "तारिक़" यानी चमकते हुए तारे की क़सम खाने से लगता है मानो वह तारा नीचे सब पर नज़र रखे हुए है। यहाँ ज़ोर इस बात पर दिया गया है कि हर जान पर एक निगरानी रखने वाला [Watcher] नियुक्त है जो हर समय कर्मों का हिसाब लिखता रहता है। चूंकि आदमी पर नज़र रखी जा रही है, और उसका हर कर्म लिखा जा रहा है, इसलिए एक दिन उससे कर्मों का हिसाब लिया जाएगा।


7. माँ की कोख सीने और पीठ के निचले हिस्सों (कमर) की हड्डियों के बीच होती है, और जिस तरह बच्चा कोख के भीतर गर्भाशय से बाहर निकल आता है, उसी तरह क़यामत के दिन मुर्दा आदमी अपनी क़बरों से बाहर निकल आएगा। 

 

12: एक नन्हे से पौधे की कोंपल इतनी भारी ज़मीन को फाड़कर जिस तरह बाहर निकल आती है, वह अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वास कर लेने के लिए काफ़ी होना चाहिए (देखें 80:26). यहाँ भी आदमी को हिसाब देने के लिए दोबारा उठाए जाने पर ज़ोर दिया गया है कि पौधे की ही तरह ज़मीन फाड़कर मुर्दे बाहर निकल आएंगे।


13: क़ुरआन को "निर्णायक फ़रमान" कहा गया है।


17: देखें 73:11

 


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